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(Photo Credit BCCI/Twitter)
इंडियन टी-20 लीग की सबसे सफल फ्रेंचाइजी मुंबई की इस सीजन शर्मनाक शुरुआत रही है। रोहित शर्मा की अगुवाई वाली टीम अब तक छह मैच खेली है जिसमें वो सभी में हारी है। पांच बार लीग का खिताब अपने नाम कर चुकी मुंबई के लिए मौजूदा सत्र में कुछ भी सही नहीं हो रहा है। अपनी ताकतवर और विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए मशहूर रोहित की टीम बल्ले से संघर्ष कर रही है, साथ ही उनकी गेंदबाजी में भी कोई धार नजर नहीं आ रही है। इस आर्टिकल में हम आपको वो 3 कारण बताएंगे जिसकी वजह से मुंबई अब तक जीत का खाता नहीं खोल पाई है:
ये हैं मुंबई की खराब शुरुआत के पीछे 3 प्रमुख कारण:
1. हरफनमौला खिलाड़ियों की कमी
अक्सर यह कहा जाता है कि सफेद गेंद वाली क्रिकेट में यदि टीमों को जीत के लिए अधिकतम संभावना रखनी है तो उन्हें अपनी टीम में हरफनमौला खिलाड़ियों को रखना चाहिए ताकि बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में गहराई आ सके। मुंबई ने पहले सीजन से ही इस मंत्र का पालन करते हुए हर साल टीम में ऑलराउंडरों की फौज रखी हुई है। पिछले सीजनों में जेम्स फ्रैंकलिन, कायरन पोलार्ड, कोरे एंडरसन, ड्वेन स्मिथ, हार्दिक पांड्या, क्रुणाल पांड्या, जैकब ओरम, बेन कटिंग आदि के होने से मुंबई को बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में गहराई मिलती रही है।
इस सीजन टीम में पोलार्ड, फेबियन एलन, टिम डेविड और डेनियल सैम्स हैं लेकिन अकेले पोलार्ड ने अंतरराष्ट्रीय स्तर और विभिन्न टी-20 लीग में निरंतर अच्छा प्रदर्शन किया है। वहीं, पांड्या भाईयों के नहीं होने से पोलार्ड पर अधिक दबाव बन रहा है। रोहित ने डेविड के साथ शुरुआत की लेकिन वे संघर्ष करते नजर आए, वहीं सैम्स गेंदबाजी में काफी महंगे साबित हुए। अब टीम ने एलन को मौका देना शुरू किया है लेकिन ये दांव भी ज़्यादा सफल होता हुआ नहीं दिख रहा है।
2. अच्छे विदेशी तेज गेंदबाज नहीं होना
मुंबई ने अब तक पांच बार इंडियन टी-20 लीग का खिताब जीता है, जिसमें हर बार उनके तरकश में अच्छे विदेशी तेज गेंदबाज मौजूद रहे हैं। लसिथ मलिंगा की स्थाई मौजूदगी के अलावा उनके पास हमेशा एक ऐसा विदेशी तेज गेंदबाज रहा है जिसने उस सीजन अपने निरंतर अच्छे प्रदर्शन से टीम को मुकाबले जिताए हैं। 2013 में मिचल जॉनसन, 2015 में मिचल मैक्लेनघन, 2017 में मिचल जॉनसन और मिचेल मैक्लेनघन, 2019 में जेसन बेहरेनडॉर्फ और 2020 में ट्रेंट बोल्ट और जेम्स पैटिनसन ने टीम को बड़े मुकाबलों में जीत दिलाई है।
वहीं, 2022 मेगा ऑक्शन में मुंबई फ्रेंचाइजी ने सारा पैसा इंग्लैंड के जोफ्रा आर्चर के लिए बचाकर रखा जो इस सीजन खेलते भी नहीं। अंत में मुंबई को टायमल मिल्स और रिले मेरेडिथ से संतोष करना पड़ा। मिल्स को जरूर टी-20 विशेषज्ञ कहा जाता है लेकिन वे अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रहे हैं। वहीं, मेरेडिथ को अब तक एक भी मौका नहीं मिला है, साथ ही सैम्स भी साधारण दिखे हैं। जसप्रीत बुमराह जरूर किफायती गेंदबाजी कर रहे हैं लेकिन उन्हें दूसरे छोर से मदद नहीं मिल रही है।
3. बल्लेबाजी में गहराई नहीं होना
मुंबई की ताकत हमेशा से विस्फोटक बल्लेबाजी रही है, जिसमें ग्लेन मैक्सवेल, एडन ब्लिजार्ड, लेंडल सिमंस, अंबाती रायुडू, क्विंटन डी कॉक, क्रिस लिन, एविन लुईस आदि शामिल हैं। वहीं, मौजूदा सीजन में उन्होंने रोहित शर्मा, कायरन पोलार्ड और सूर्यकुमार यादव को रिटेन किया जबकि इशान किशन को सबसे ज्यादा 15.25 करोड़ रुपये में खरीदा।
पिछले सीजन तक साथ रहे डी कॉक, हार्दिक और क्रुणाल पांड्या के चले जाने के बावजूद मुंबई ने उनकी जगह किसी को लेने की कोशिश नहीं की। एक और ट्रेंड जो अब तक उनके विजयी अभियानों में नजर आया, वो था रोहित शर्मा के साथ एक आक्रामक और निरंतर प्रदर्शन करने वाले बल्लेबाज का होना। फिलहाल, इशान किशन पर उनकी कीमत का दबाव साफतौर पर देखने को मिल रहा है। साथ ही युवा डेवाल्ड ब्रेविस और तिलक वर्मा से अत्यधिक उम्मीदें रखी जा रही हैं।